॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.19.9
यतो यतोऽहं तत्रासौ मृत्युः प्राणभृतामिव।
अतोऽहमस्य हृदयं प्रवेक्ष्यामि पराग्दृशः॥ ९
yato yato'haṃ tatrāsau mṛtyuḥ prāṇabhṛtāmiva|
ato'hamasya hṛdayaṃ pravekṣyāmi parāgdṛśaḥ|| 9
अर्थ
‘जैसे संसारके प्राणियोंके पीछे मृत्यु लगी रहती है—वैसे ही मैं जहाँ-जहाँ जाऊँगा, वहीं-वहीं यह मेरा पीछा करेगा। इसलिये मैं इसके हृदयमें प्रवेश कर जाऊँ, जिससे यह मुझे देख न सके; क्योंकि यह तो बहिर्मुख है, बाहरकी वस्तुएँ ही देखता है॥ ९॥✎ 792