पर्वतराज त्रिकूटकी तराईमें भगवत्प्रेमी महात्मा भगवान् वरुणका एक उद्यान था। उसका नाम था ऋतुमान्। उसमें देवांगनाएँ क्रीडा करती रहती थीं॥ ९॥
तस्य द्रोण्यां भगवतो वरुणस्य महात्मनः।
उद्यानमृतुमन्नाम आक्रीडं सुरयोषिताम्॥ ९
पर्वतराज त्रिकूटकी तराईमें भगवत्प्रेमी महात्मा भगवान् वरुणका एक उद्यान था। उसका नाम था ऋतुमान्। उसमें देवांगनाएँ क्रीडा करती रहती थीं॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.2.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 910) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/2/9/