॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.20.22
काये बलिस्तस्य महाविभूतेः
सहर्त्विगाचार्यसदस्य एतत्।
ददर्श विश्वं त्रिगुणं गुणात्मके
भूतेन्द्रियार्थाशयजीवयुक्तम् ॥ २२
kāye balistasya mahāvibhūteḥ
sahartvigācāryasadasya etat|
dadarśa viśvaṃ triguṇaṃ guṇātmake
bhūtendriyārthāśayajīvayuktam || 22
अर्थ
ऋत्विज्, आचार्य और सदस्योंके साथ बलिने समस्त ऐश्वर्योंके एकमात्र स्वामी भगवान्के उस त्रिगुणात्मक शरीरमें पंचभूत, इन्द्रिय, उनके विषय, अन्तःकरण और जीवोंके साथ वह सम्पूर्ण त्रिगुणमय जगत् देखा॥ २२॥