श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.7

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

श्रेयः कुर्वन्ति भूतानां साधवो दुस्त्यजासुभिः।

दध्यङ् शिबिप्रभृतयः को विकल्पो धरादिषु॥ ७

śreyaḥ kurvanti bhūtānāṃ sādhavo dustyajāsubhiḥ|

dadhyaṅ śibiprabhṛtayaḥ ko vikalpo dharādiṣu|| 7

अर्थ

दधीचि, शिबि आदि महापुरुषोंने अपने परम प्रिय दुस्त्यज प्राणोंका दान करके भी प्राणियोंकी भलाई की है। फिर पृथ्वी आदि वस्तुओंको देनेमें सोच-विचार करनेकी क्या आवश्यकता है?॥ ७॥

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