श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! राजा बलि इस प्रकार कह ही रहे थे कि उदय होते हुए चन्द्रमाके समान भगवान्के प्रेमपात्र प्रह्लादजी वहाँ आ पहुँचे॥ १२॥
तस्येत्थं भाषमाणस्य प्रह्रादो भगवत्प्रियः।
आजगाम कुरुश्रेष्ठ राकापतिरिवोत्थितः॥ १२
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! राजा बलि इस प्रकार कह ही रहे थे कि उदय होते हुए चन्द्रमाके समान भगवान्के प्रेमपात्र प्रह्लादजी वहाँ आ पहुँचे॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1007) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/22/12/