श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.22.24

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

ब्रह्मन् यमनुगृह्णामि तद्विशो विधुनोम्यहम्।

यन्मदः पुरुषः स्तब्धो लोकं मां चावमन्यते॥ २४

brahman yamanugṛhṇāmi tadviśo vidhunomyaham|

yanmadaḥ puruṣaḥ stabdho lokaṃ māṃ cāvamanyate|| 24

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—ब्रह्माजी! मैं जिसपर कृपा करता हूँ, उसका धन छीन लिया करता हूँ। क्योंकि जब मनुष्य धनके मदसे मतवाला हो जाता है, तब मेरा और लोगोंका तिरस्कार करने लगता है॥ २४॥✎ 816

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #816 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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