यह बलि दानव और दैत्य दोनों ही वंशोंमें अग्रगण्य और उनकी कीर्ति बढ़ानेवाला है। इसने उस मायापर विजय प्राप्त कर ली है, जिसे जीतना अत्यन्त कठिन है। तुम देख ही रहे हो, इतना दुःख भोगनेपर भी यह मोहित नहीं हुआ॥ २८॥✎ 816
एष दानवदैत्यानामग्रणीः कीर्तिवर्धनः।
अजैषीदजयां मायां सीदन्नपि न मुह्यति॥ २८
यह बलि दानव और दैत्य दोनों ही वंशोंमें अग्रगण्य और उनकी कीर्ति बढ़ानेवाला है। इसने उस मायापर विजय प्राप्त कर ली है, जिसे जीतना अत्यन्त कठिन है। तुम देख ही रहे हो, इतना दुःख भोगनेपर भी यह मोहित नहीं हुआ॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.22.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1009) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/22/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#816 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने