श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.23.17

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तथापि वदतो भूमन् करिष्याम्यनुशासनम्।

एतच्छ्रेयः परं पुंसां यत् तवाज्ञानुपालनम्॥ १७

tathāpi vadato bhūman kariṣyāmyanuśāsanam|

etacchreyaḥ paraṃ puṃsāṃ yat tavājñānupālanam|| 17

अर्थ

तथापि अनन्त! जब आप स्वयं कह रहे हैं, तब मैं आपकी आज्ञाका अवश्य पालन करूँगा। मनुष्यके लिये सबसे बड़ा कल्याणका साधन यही है कि वह आपकी आज्ञाका पालन करे॥ १७॥

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