॥ श्रीहरिः ॥
सर्वमेतन्मयाऽऽख्यातं भवतः कुलनन्दन।
उरुक्रमस्य चरितं श्रोतॄणामघमोचनम्॥ २८
sarvametanmayā''khyātaṃ bhavataḥ kulanandana|
urukramasya caritaṃ śrotṝṇāmaghamocanam|| 28
अर्थ
परीक्षित्! तुम्हें मैंने भगवान्की यह सब लीला सुनायी। इससे सुननेवालोंके सारे पाप छूट जाते हैं॥ २८॥✎ 824 825 826 1629
सर्वमेतन्मयाऽऽख्यातं भवतः कुलनन्दन।
उरुक्रमस्य चरितं श्रोतॄणामघमोचनम्॥ २८
परीक्षित्! तुम्हें मैंने भगवान्की यह सब लीला सुनायी। इससे सुननेवालोंके सारे पाप छूट जाते हैं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.23.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1013) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/23/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
- #824 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #825 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् को → वामनभगवान्को
- #826 शब्दोंके बीचका स्थान: वामन-भगवान् को → वामन-भगवान्को
- #1629 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वामन-भगवान्को → वामनभगवान्को