राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवान्के कर्म बड़े अद्भुत हैं। उन्होंने एक बार अपनी योगमायासे मत्स्यावतार धारण करके बड़ी सुन्दर लीला की थी, मैं उनके उसी आदि-अवतारकी कथा सुनना चाहता हूँ॥ १॥✎ 830
भगवञ्छ्रोतुमिच्छामि हरेरद्भुतकर्मणः।
अवतारकथामाद्यां मायामत्स्यविडम्बनम्॥ १
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवान्के कर्म बड़े अद्भुत हैं। उन्होंने एक बार अपनी योगमायासे मत्स्यावतार धारण करके बड़ी सुन्दर लीला की थी, मैं उनके उसी आदि-अवतारकी कथा सुनना चाहता हूँ॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1014) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)