श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.25

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

एवं विमोहितस्तेन वदता वल्गुभारतीम्।

तमाह को भवानस्मान् मत्स्यरूपेण मोहयन्॥ २५

evaṃ vimohitastena vadatā valgubhāratīm|

tamāha ko bhavānasmān matsyarūpeṇa mohayan|| 25

अर्थ

मत्स्यभगवान्‌की यह मधुर वाणी सुनकर राजा सत्यव्रत मोहमुग्ध हो गये। उन्होंने कहा—‘मत्स्यका रूप धारण करके मुझे मोहित करनेवाले आप कौन हैं?॥ २५॥✎ 834

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #834 शब्दोंके बीचका स्थान: मत्स्यभगवान् की → मत्स्यभगवान्‌की

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