श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.3

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

एतन्‍नो भगवन् सर्वं यथावद् वक्तुमर्हसि।

उत्तमश्लोकचरितं सर्वलोकसुखावहम्॥ ३

etanno bhagavan sarvaṃ yathāvad vaktumarhasi|

uttamaślokacaritaṃ sarvalokasukhāvaham|| 3

अर्थ

भगवन्! महात्माओंके कीर्तनीय भगवान्‌का चरित्र समस्त प्राणियोंको सुख देनेवाला है। आप कृपा करके उनकी वह सब लीला हमारे सामने पूर्णरूपसे वर्णन कीजिये॥ ३॥✎ 830

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #830 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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