सप्तर्षियोंने बड़े प्रेमसे राजा सत्यव्रतसे कहा—‘राजन्! तुम भगवान्का ध्यान करो। वे ही हमें इस संकटसे बचायेंगे और हमारा कल्याण करेंगे’॥ ४३॥✎ 838
तमूचुर्मुनयः प्रीता राजन् ध्यायस्व केशवम्।
स वै नः संकटादस्मादविता शं विधास्यति॥ ४३
सप्तर्षियोंने बड़े प्रेमसे राजा सत्यव्रतसे कहा—‘राजन्! तुम भगवान्का ध्यान करो। वे ही हमें इस संकटसे बचायेंगे और हमारा कल्याण करेंगे’॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1018) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/43/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)