भगवान्ने पहले जैसी आज्ञा दी थी, उसके अनुसार वह नौका वासुकिनागके द्वारा भगवान्के सींगमें बाँध दी गयी और राजा सत्यव्रतने प्रसन्न होकर भगवान्की स्तुति की॥ ४५॥✎ 839840841
निबध्य नावं तच्छृङ्गे यथोक्तो हरिणा पुरा।
वरत्रेणाहिना तुष्टस्तुष्टाव मधुसूदनम्॥ ४५
भगवान्ने पहले जैसी आज्ञा दी थी, उसके अनुसार वह नौका वासुकिनागके द्वारा भगवान्के सींगमें बाँध दी गयी और राजा सत्यव्रतने प्रसन्न होकर भगवान्की स्तुति की॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1019) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)