॥ श्रीहरिः ॥
अश्रौषीदृषिभिः साकमात्मतत्त्वमसंशयम्।
नाव्यासीनो भगवता प्रोक्तं ब्रह्म सनातनम्॥ ५६
aśrauṣīdṛṣibhiḥ sākamātmatattvamasaṃśayam|
nāvyāsīno bhagavatā proktaṃ brahma sanātanam|| 56
अर्थ
सत्यव्रतने ऋषियोंके साथ नावमें बैठे हुए ही सन्देहरहित होकर भगवान्के द्वारा उपदिष्ट सनातन ब्रह्मस्वरूप आत्मतत्त्वका श्रवण किया॥ ५६॥
अश्रौषीदृषिभिः साकमात्मतत्त्वमसंशयम्।
नाव्यासीनो भगवता प्रोक्तं ब्रह्म सनातनम्॥ ५६
सत्यव्रतने ऋषियोंके साथ नावमें बैठे हुए ही सन्देहरहित होकर भगवान्के द्वारा उपदिष्ट सनातन ब्रह्मस्वरूप आत्मतत्त्वका श्रवण किया॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1020) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/56/