कुरुवंशशिरोमणि परीक्षित्! मैंने भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा तथा गजेन्द्रके उद्धारकी कथा तुम्हें सुना दी। यह प्रसंग सुननेवालोंके कलिमल और दुःस्वप्नको मिटानेवाला एवं यश, उन्नति और स्वर्ग देनेवाला है॥ १४॥✎ 674
एतन्महाराज तवेरितो मया
कृष्णानुभावो गजराजमोक्षणम्।
स्वर्ग्यं यशस्यं कलिकल्मषापहं
दुःस्वप्ननाशं कुरुवर्य शृण्वताम्॥ १४
कुरुवंशशिरोमणि परीक्षित्! मैंने भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा तथा गजेन्द्रके उद्धारकी कथा तुम्हें सुना दी। यह प्रसंग सुननेवालोंके कलिमल और दुःस्वप्नको मिटानेवाला एवं यश, उन्नति और स्वर्ग देनेवाला है॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 921) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/4/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#674 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीहरिभगवान् ने → श्रीहरिभगवान्ने