परीक्षित्! गजेन्द्रकी स्तुतिसे प्रसन्न होकर सर्वव्यापक एवं सर्वभूतस्वरूप श्रीहरिभगवान्ने सब लोगोंके सामने ही उसे यह बात कही थी॥ १६॥✎ 674
इदमाह हरिः प्रीतो गजेन्द्रं कुरुसत्तम।
शृण्वतां सर्वभूतानां सर्वभूतमयो विभुः॥ १६
परीक्षित्! गजेन्द्रकी स्तुतिसे प्रसन्न होकर सर्वव्यापक एवं सर्वभूतस्वरूप श्रीहरिभगवान्ने सब लोगोंके सामने ही उसे यह बात कही थी॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 921) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/4/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#674 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीहरिभगवान् ने → श्रीहरिभगवान्ने