श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.4.16

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इदमाह हरिः प्रीतो गजेन्द्रं कुरुसत्तम।

शृण्वतां सर्वभूतानां सर्वभूतमयो विभुः॥ १६

idamāha hariḥ prīto gajendraṃ kurusattama|

śṛṇvatāṃ sarvabhūtānāṃ sarvabhūtamayo vibhuḥ|| 16

अर्थ

परीक्षित्! गजेन्द्रकी स्तुतिसे प्रसन्‍न होकर सर्वव्यापक एवं सर्वभूतस्वरूप श्रीहरिभगवान्‌ने सब लोगोंके सामने ही उसे यह बात कही थी॥ १६॥✎ 674

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #674 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीहरिभगवान् ने → श्रीहरिभगवान्‌ने

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