तब वे सब-के-सब सुमेरुके शिखरपर स्थित ब्रह्माजीकी सभामें गये और वहाँ उन लोगोंने बड़ी नम्रतासे ब्रह्माजीकी सेवामें अपनी परिस्थितिका विस्तृत विवरण उपस्थित किया॥ १८॥
ततो ब्रह्मसभां जग्मुर्मेरोर्मूर्धनि सर्वशः।
सर्वं विज्ञापयाञ्चक्रुः प्रणताः परमेष्ठिने॥ १८
तब वे सब-के-सब सुमेरुके शिखरपर स्थित ब्रह्माजीकी सभामें गये और वहाँ उन लोगोंने बड़ी नम्रतासे ब्रह्माजीकी सेवामें अपनी परिस्थितिका विस्तृत विवरण उपस्थित किया॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 924) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/5/18/