श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.18

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ततो ब्रह्मसभां जग्मुर्मेरोर्मूर्धनि सर्वशः।

सर्वं विज्ञापयाञ्चक्रुः प्रणताः परमेष्ठिने॥ १८

tato brahmasabhāṃ jagmurmerormūrdhani sarvaśaḥ|

sarvaṃ vijñāpayāñcakruḥ praṇatāḥ parameṣṭhine|| 18

अर्थ

तब वे सब-के-सब सुमेरुके शिखरपर स्थित ब्रह्माजीकी सभामें गये और वहाँ उन लोगोंने बड़ी नम्रतासे ब्रह्माजीकी सेवामें अपनी परिस्थितिका विस्तृत विवरण उपस्थित किया॥ १८॥

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