श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.20

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

समाहितेन मनसा संस्मरन्पुरुषं परम्।

उवाचोत्फुल्लवदनो देवान्स भगवान्परः॥ २०✎ 964

samāhitena manasā saṃsmaranpuruṣaṃ param|

uvācotphullavadano devānsa bhagavānparaḥ|| 20

अर्थ

समर्थ ब्रह्माजीने अपना मन एकाग्र करके परम पुरुष भगवान्‌का स्मरण किया; फिर थोड़ी देर रुककर प्रफुल्लित मुखसे देवताओंको सम्बोधित करते हुए कहा॥ २०॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #964 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् पर:॥ → भगवान्परः॥

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