श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.33

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अम्भस्तु यद्रेत उदारवीर्यं

सिध्यन्ति जीवन्त्युत वर्धमानाः।

लोकास्त्रयोऽथाखिललोकपालाः

प्रसीदतां ब्रह्म महाविभूतिः॥ ३३

ambhastu yadreta udāravīryaṃ

sidhyanti jīvantyuta vardhamānāḥ|

lokāstrayo'thākhilalokapālāḥ

prasīdatāṃ brahma mahāvibhūtiḥ|| 33

अर्थ

यह परम शक्तिशाली जल उन्हींका वीर्य है। इसीसे तीनों लोक और समस्त लोकोंके लोकपाल उत्पन्‍न होते, बढ़ते और जीवित रहते हैं। वे परम ऐश्‍वर्यशाली परब्रह्म हमपर प्रसन्‍न हों॥ ३३॥

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