श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तस्यानुभावः कथितो गुणाश्‍च परमोदयाः।

भौमान् रेणून्स विममे यो विष्णोर्वर्णयेद् गुणान्॥ ६

tasyānubhāvaḥ kathito guṇāśca paramodayāḥ|

bhaumān reṇūnsa vimame yo viṣṇorvarṇayed guṇān|| 6

अर्थ

उन वैकुण्ठनाथके कल्याणमय गुण और प्रभावका वर्णन मैं संक्षेपसे (तीसरे स्कन्धमें) कर चुका हूँ। भगवान् विष्णुके सम्पूर्ण गुणोंका वर्णन तो वह करे, जिसने पृथ्वीके परमाणुओंकी गिनती कर ली हो॥ ६॥✎ 679

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #679 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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