श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.6.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सहायेन मया देवा निर्मन्थध्वमतन्द्रिताः।

क्लेशभाजो भविष्यन्ति दैत्या यूयं फलग्रहाः॥ २३

sahāyena mayā devā nirmanthadhvamatandritāḥ|

kleśabhājo bhaviṣyanti daityā yūyaṃ phalagrahāḥ|| 23

अर्थ

पहले क्षीरसागरमें सब प्रकारके घास, तिनके, लताएँ और ओषधियाँ डाल दो। फिर तुमलोग मन्दराचलकी मथानी और वासुकि नागकी नेती बनाकर मेरी सहायतासे समुद्रका मन्थन करो। अब आलस्य और प्रमादका समय नहीं है। देवताओ! विश्वास रखो—दैत्योंको तो मिलेगा केवल श्रम और क्लेश, परन्तु फल मिलेगा तुम्हीं लोगोंको॥ २२-२३॥✎ 692

यह अर्थ श्लोक 22–23 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #692 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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