॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.6.3
विरिञ्चो भगवान् दृष्ट्वा सह शर्वेण तां तनुम्।
स्वच्छां मरकतश्यामां कञ्जगर्भारुणेक्षणाम्॥ ३
viriñco bhagavān dṛṣṭvā saha śarveṇa tāṃ tanum|
svacchāṃ marakataśyāmāṃ kañjagarbhāruṇekṣaṇām|| 3
अर्थ
केवल भगवान् शंकर और ब्रह्माजीने उस छबिका दर्शन किया। बड़ी ही सुन्दर झाँकी थी। मरकतमणि (पन्ने)-के समान स्वच्छ श्यामल शरीर, कमलके भीतरी भागके समान सुकुमार नेत्रोंमें लाल-लाल डोरियाँ और चमकते हुए सुनहले रंगका रेशमी पीताम्बर! सर्वांगसुन्दर शरीरके रोम-रोमसे प्रसन्नता फूटी पड़ती थी। धनुषके समान टेढ़ी भौंहें और बड़ा ही सुन्दर मुख। सिरपर महामणिमय किरीट और भुजाओंमें बाजूबंद। कानोंके झलकते हुए कुण्डलोंकी चमक पड़नेसे कपोल और भी सुन्दर हो उठते थे, जिससे मुखकमल खिल उठता था। कमरमें करधनीकी लड़ियाँ, हाथोंमें कंगन, गलेमें हार और चरणोंमें नूपुर शोभायमान थे। वक्षःस्थलपर लक्ष्मी और गलेमें कौस्तुभमणि तथा वनमाला सुशोभित थीं॥ ३—६॥✎ 689 690 2031