श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.6.31

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तद१रोचत दैत्यस्य तत्रान्ये येऽसुराधिपाः।

शम्बरोऽरिष्टनेमिश्‍च ये च त्रिपुरवासिनः॥ ३१

tadarocata daityasya tatrānye ye'surādhipāḥ|

śambaro'riṣṭanemiśca ye ca tripuravāsinaḥ|| 31

अर्थ

वह बात दैत्यराज बलिको जँच गयी। वहाँ बैठे हुए दूसरे सेनापति शम्बर, अरिष्टनेमि और त्रिपुरनिवासी असुरोंको भी यह बात बहुत अच्छी लगी॥ ३१॥✎ 694

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—तत्त्वरो०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 933)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #694 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें