भगवान्के निज अस्त्र सुदर्शन चक्र आदि मूर्तिमान् होकर उनकी सेवा कर रहे थे। सभी देवताओंने पृथ्वीपर गिरकर साष्टांग प्रणाम किया फिर सारे देवताओंको साथ ले शंकरजी तथा ब्रह्माजी परम पुरुष भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ७॥✎ 691
सुदर्शनादिभिः स्वास्त्रैर्मूर्तिमद्भिरुपासिताम्।
तुष्टाव देवप्रवरः सशर्वः पुरुषं परम्।
सर्वामरगणैः साकं सर्वाङ्गैरवनिं गतैः॥ ७
भगवान्के निज अस्त्र सुदर्शन चक्र आदि मूर्तिमान् होकर उनकी सेवा कर रहे थे। सभी देवताओंने पृथ्वीपर गिरकर साष्टांग प्रणाम किया फिर सारे देवताओंको साथ ले शंकरजी तथा ब्रह्माजी परम पुरुष भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 930) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)