श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.7.11

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तथासुरानाविशदासुरेण

रूपेण तेषां बलवीर्यमीरयन्।

उद्दीपयन् देवगणांश्‍च विष्णु-

र्दैवेन नागेन्द्रमबोधरूपः॥ ११

tathāsurānāviśadāsureṇa

rūpeṇa teṣāṃ balavīryamīrayan|

uddīpayan devagaṇāṃśca viṣṇu-

rdaivena nāgendramabodharūpaḥ|| 11

अर्थ

साथ ही समुद्रमन्थन सम्पन्‍न करनेके लिये भगवान्‌ने असुरोंमें उनकी शक्ति और बलको बढ़ाते हुए असुररूपसे प्रवेश किया। वैसे ही उन्होंने देवताओंको उत्साहित करते हुए उनमें देवरूपसे प्रवेश किया और वासुकिनागमें निद्राके रूपसे॥ ११॥✎ 702

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #702 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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