साथ ही समुद्रमन्थन सम्पन्न करनेके लिये भगवान्ने असुरोंमें उनकी शक्ति और बलको बढ़ाते हुए असुररूपसे प्रवेश किया। वैसे ही उन्होंने देवताओंको उत्साहित करते हुए उनमें देवरूपसे प्रवेश किया और वासुकिनागमें निद्राके रूपसे॥ ११॥✎ 702
तथासुरानाविशदासुरेण
रूपेण तेषां बलवीर्यमीरयन्।
उद्दीपयन् देवगणांश्च विष्णु-
र्दैवेन नागेन्द्रमबोधरूपः॥ ११
साथ ही समुद्रमन्थन सम्पन्न करनेके लिये भगवान्ने असुरोंमें उनकी शक्ति और बलको बढ़ाते हुए असुररूपसे प्रवेश किया। वैसे ही उन्होंने देवताओंको उत्साहित करते हुए उनमें देवरूपसे प्रवेश किया और वासुकिनागमें निद्राके रूपसे॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.7.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 936) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/7/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)