प्रजापतियोंने भगवान् शंकरकी स्तुति की—देवताओंके आराध्यदेव महादेव! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा और उनके जीवनदाता हैं। हमलोग आपकी शरणमें आये हैं। त्रिलोकीको भस्म करनेवाले इस उग्र विषसे आप हमारी रक्षा कीजिये॥ २१॥
देवदेव महादेव भूतात्मन् भूतभावन।
त्राहि नः शरणापन्नांस्त्रैलोक्यदहनाद् विषात्॥ २१
प्रजापतियोंने भगवान् शंकरकी स्तुति की—देवताओंके आराध्यदेव महादेव! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा और उनके जीवनदाता हैं। हमलोग आपकी शरणमें आये हैं। त्रिलोकीको भस्म करनेवाले इस उग्र विषसे आप हमारी रक्षा कीजिये॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.7.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 937) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/7/21/