॥ श्रीहरिः ॥
समुद्रः पीतकौशेयवाससी समुपाहरत्।
वरुणः स्रजं वैजयन्तीं मधुना मत्तषट्पदाम्॥ १५
samudraḥ pītakauśeyavāsasī samupāharat|
varuṇaḥ srajaṃ vaijayantīṃ madhunā mattaṣaṭpadām|| 15
अर्थ
समुद्रने पीले रेशमी वस्त्र उनको पहननेके लिये दिये। वरुणने ऐसी वैजयन्ती माला समर्पित की, जिसकी मधुमय सुगन्धसे भौंरे मतवाले हो रहे थे॥ १५॥
समुद्रः पीतकौशेयवाससी समुपाहरत्।
वरुणः स्रजं वैजयन्तीं मधुना मत्तषट्पदाम्॥ १५
समुद्रने पीले रेशमी वस्त्र उनको पहननेके लिये दिये। वरुणने ऐसी वैजयन्ती माला समर्पित की, जिसकी मधुमय सुगन्धसे भौंरे मतवाले हो रहे थे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.8.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 943) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/8/15/