श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.10

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सालावृकाणां स्त्रीणां च स्वैरिणीनां सुरद्विषः।

सख्यान्याहुरनित्यानि नूत्नं नूत्नं विचिन्वताम्॥ १०

sālāvṛkāṇāṃ strīṇāṃ ca svairiṇīnāṃ suradviṣaḥ|

sakhyānyāhuranityāni nūtnaṃ nūtnaṃ vicinvatām|| 10

अर्थ

दैत्यो! कुत्ते और व्यभिचारिणी स्त्रियोंकी मित्रता स्थायी नहीं होती। वे दोनों ही सदा नये-नये शिकार ढूँढ़ा करते हैं॥ १०॥

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