श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.21

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

दैत्यान्गृहीतकलशो वञ्चयन्‍नुपसञ्चरैः।

दूरस्थान् पाययामास जरामृत्युहरां सुधाम्॥ २१

daityāngṛhītakalaśo vañcayannupasañcaraiḥ|

dūrasthān pāyayāmāsa jarāmṛtyuharāṃ sudhām|| 21

अर्थ

इसके बाद अमृतका कलश हाथमें लेकर भगवान् दैत्योंके पास चले गये। उन्हें हाव-भाव और कटाक्षसे मोहित करके दूर बैठे हुए देवताओंके पास आ गये तथा उन्हें वह अमृत पिलाने लगे, जिसे पी लेनेपर बुढ़ापे और मृत्युका नाश हो जाता है॥ २१॥✎ 719 720

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #719 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #720 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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