praviṣṭaḥ somamapibaccandrārkābhyāṃ ca sūcitaḥ|| 24
अर्थ
जिस समय भगवान् देवताओंको अमृत पिला रहे थे, उसी समय राहु दैत्य देवताओंका वेष बनाकर उनके बीचमें आ बैठा और देवताओंके साथ उसने भी अमृत पी लिया। परन्तु तत्क्षण चन्द्रमा और सूर्यने उसकी पोल खोल दी॥ २४॥
देवलिङ्गप्रतिच्छन्नः स्वर्भानुर्देवसंसदि।
प्रविष्टः सोममपिबच्चन्द्रार्काभ्यां च सूचितः॥ २४
जिस समय भगवान् देवताओंको अमृत पिला रहे थे, उसी समय राहु दैत्य देवताओंका वेष बनाकर उनके बीचमें आ बैठा और देवताओंके साथ उसने भी अमृत पी लिया। परन्तु तत्क्षण चन्द्रमा और सूर्यने उसकी पोल खोल दी॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 950) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/9/24/