श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.26

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

शिरस्त्वमरतां नीतमजो ग्रहमचीक्लृपत्।

यस्तु पर्वणि चन्द्रार्कावभिधावति वैरधीः॥ २६

śirastvamaratāṃ nītamajo grahamacīklṛpat|

yastu parvaṇi candrārkāvabhidhāvati vairadhīḥ|| 26

अर्थ

परन्तु सिर अमर हो गया और ब्रह्माजीने उसे ‘ग्रह’ बना दिया। वही राहु पर्वके दिन (पूर्णिमा और अमावस्याको) वैर-भावसे बदला लेनेके लिये चन्द्रमा तथा सूर्यपर आक्रमण किया करता है॥ २६॥

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