श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.17

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भगवन् किमिदं जातं कर्म वो ब्रह्मवादिनाम्।

विपर्ययमहो कष्टं मैवं स्याद् ब्रह्मविक्रिया॥ १७

bhagavan kimidaṃ jātaṃ karma vo brahmavādinām|

viparyayamaho kaṣṭaṃ maivaṃ syād brahmavikriyā|| 17

अर्थ

‘भगवन्! आपलोग तो ब्रह्मवादी हैं, आपका कर्म इस प्रकार विपरीत फल देनेवाला कैसे हो गया? अरे, यह तो बड़े दुःखकी बात है। वैदिक कर्मका ऐसा विपरीत फल तो कभी नहीं होना चाहिये॥ १७॥

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