जब होताने इस प्रकार विपरीत कर्म किया, तब यज्ञके फलस्वरूप पुत्रके स्थानपर इला नामकी कन्या हुई। उसे देखकर श्राद्धदेव मनुका मन कुछ विशेष प्रसन्न नहीं हुआ। उन्होंने अपने गुरु वसिष्ठजीसे कहा—॥ १६॥
होतुस्तद्व्यभिचारेण कन्येला नाम साभवत्।
तां विलोक्य मनुः प्राह नातिहृष्टमना गुरुम्॥ १६
जब होताने इस प्रकार विपरीत कर्म किया, तब यज्ञके फलस्वरूप पुत्रके स्थानपर इला नामकी कन्या हुई। उसे देखकर श्राद्धदेव मनुका मन कुछ विशेष प्रसन्न नहीं हुआ। उन्होंने अपने गुरु वसिष्ठजीसे कहा—॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 8) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/16/