श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स एकदा महाराज विचरन् मृगयां वने।

वृतः कतिपयामात्यैर२श्‍वमारुह्य सैन्धवम्॥ २३

sa ekadā mahārāja vicaran mṛgayāṃ vane|

vṛtaḥ katipayāmātyairaśvamāruhya saindhavam|| 23

अर्थ

महाराज! एक बार राजा सुद्युम्‍न शिकार खेलनेके लिये सिन्धुदेशके घोड़ेपर सवार होकर कुछ मन्त्रियोंके साथ वनमें गये॥ २३॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    रथ०।

    (मुद्रित पृष्ठ 9)

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