श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.34

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अथ तामाश्रमाभ्याशे चरन्तीं प्रमदोत्तमाम्।

स्त्रीभिः परिवृतां वीक्ष्य चकमे भगवान् बुधः॥ ३४

atha tāmāśramābhyāśe carantīṃ pramadottamām|

strībhiḥ parivṛtāṃ vīkṣya cakame bhagavān budhaḥ|| 34

अर्थ

उसी समय शक्तिशाली बुधने देखा कि मेरे आश्रमके पास ही बहुत-सी स्त्रियोंसे घिरी हुई एक सुन्दरी स्त्री विचर रही है। उन्होंने इच्छा की कि यह मुझे प्राप्त हो जाय॥ ३४॥ उस सुन्दरी स्त्रीने भी चन्द्रकुमार बुधको पति बनाना चाहा। इसपर बुधने उसके गर्भसे पुरूरवा नामका पुत्र उत्पन्‍न किया॥ ३५॥ इस प्रकार मनुपुत्र राजा सुद्युम्‍न स्त्री हो गये। ऐसा सुनते हैं कि उन्होंने उस अवस्थामें अपने कुलपुरोहित वसिष्ठजीका स्मरण किया॥ ३६॥

यह व्याख्या श्लोक 9.1.34 से 9.1.36 तककी एक साथ है।

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