परीक्षित्! तभीसे पुरुष उस स्थानमें प्रवेश नहीं करते। अब सुद्युम्न स्त्री हो गये थे। इसलिये वे अपने स्त्री बने हुए अनुचरोंके साथ एक वनसे दूसरे वनमें विचरने लगे॥ ३३॥
तत ऊर्ध्वं वनं तद् वै पुरुषा वर्जयन्ति हि।
सा चानुचरसंयुक्ता विचचार वनाद् वनम्॥ ३३
परीक्षित्! तभीसे पुरुष उस स्थानमें प्रवेश नहीं करते। अब सुद्युम्न स्त्री हो गये थे। इसलिये वे अपने स्त्री बने हुए अनुचरोंके साथ एक वनसे दूसरे वनमें विचरने लगे॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 10) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/33/