pālayāmāsa jagatīṃ nābhyanandan sma taṃ prajāḥ|| 40
अर्थ
इस प्रकार वसिष्ठजीके अनुग्रहसे व्यवस्था-पूर्वक अभीष्ट पुरुषत्व लाभ करके सुद्युम्न पृथ्वीका पालन करने लगे। परंतु प्रजा उनका अभिनन्दन नहीं करती थी॥ ४०॥
आचार्यानुग्रहात् कामं लब्ध्वा पुंस्त्वं व्यवस्थया।
पालयामास जगतीं नाभ्यनन्दन् स्म तं प्रजाः॥ ४०
इस प्रकार वसिष्ठजीके अनुग्रहसे व्यवस्था-पूर्वक अभीष्ट पुरुषत्व लाभ करके सुद्युम्न पृथ्वीका पालन करने लगे। परंतु प्रजा उनका अभिनन्दन नहीं करती थी॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 11) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/40/