॥ श्रीहरिः ॥
ततो निष्क्रम्य लंकाया यातुधान्यः सहस्रशः।
मन्दोदर्या समं तस्मिन् प्र२रुदत्य उपाद्रवन्॥ २४
tato niṣkramya laṃkāyā yātudhānyaḥ sahasraśaḥ|
mandodaryā samaṃ tasmin prarudatya upādravan|| 24
अर्थ
तदनन्तर हजारों राक्षसियाँ मन्दोदरीके साथ रोती हुई लंकासे निकल पड़ीं और रणभूमिमें आयीं॥ २४॥
ततो निष्क्रम्य लंकाया यातुधान्यः सहस्रशः।
मन्दोदर्या समं तस्मिन् प्ररुदत्य उपाद्रवन्॥ २४
तदनन्तर हजारों राक्षसियाँ मन्दोदरीके साथ रोती हुई लंकासे निकल पड़ीं और रणभूमिमें आयीं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 56) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/10/24/टिप्पणियाँ
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रुदत्यस्ता०।
(मुद्रित पृष्ठ 56)