श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ततो ददर्श भगवानशोकवनिकाश्रमे१।

क्षामां स्वविरहव्याधिं शिंशपामूलमास्थिताम्॥ ३०

tato dadarśa bhagavānaśokavanikāśrame|

kṣāmāṃ svavirahavyādhiṃ śiṃśapāmūlamāsthitām|| 30

अर्थ

इसके बाद भगवान् श्रीरामने अशोक-वाटिकाके आश्रममें अशोक वृक्षके नीचे बैठी हुई श्रीसीताजीको देखा। वे उन्हींके विरहकी व्याधिसे पीड़ित एवं अत्यन्त दुर्बल हो रही थीं॥ ३०॥✎ 2049

टिप्पणियाँ

  1. १

    कावने।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 57)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2049 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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