श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.15

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

मुनौ निक्षिप्य तनयौ सीता भर्त्रा विवासिता।

ध्यायन्ती रामचरणौ विवरं प्रविवेश ह॥ १५

munau nikṣipya tanayau sītā bhartrā vivāsitā|

dhyāyantī rāmacaraṇau vivaraṃ praviveśa ha|| 15

अर्थ

भगवान् श्रीरामके द्वारा निर्वासित सीताजीने अपने पुत्रोंको वाल्मीकिजीके हाथोंमें सौंप दिया और भगवान् श्रीरामके चरणकमलोंका ध्यान करती हुई वे पृथ्वीदेवीके लोकमें चली गयीं॥ १५॥

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