श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.16

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वा भगवान् रामो रुन्धन्‍नपि धिया शुचः।

स्मरंस्तस्या गुणांस्तांस्तान्‍नाशक्‍नोद् रोद्धुमीश्‍वरः॥ १६

tacchrutvā bhagavān rāmo rundhannapi dhiyā śucaḥ|

smaraṃstasyā guṇāṃstāṃstānnāśaknod roddhumīśvaraḥ|| 16

अर्थ

यह समाचार सुनकर भगवान् श्रीरामने अपने शोका-वेशको बुद्धिके द्वारा रोकना चाहा, परन्तु परम समर्थ होनेपर भी वे उसे रोक न सके। क्योंकि उन्हें जानकीजीके पवित्र गुण बार-बार स्मरण हो आया करते थे॥ १६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें