श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.3

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

आचार्याय ददौ शेषां यावती भूस्तदन्तरा।

मन्यमान इदं कृत्स्नं ब्राह्मणोऽर्हति निःस्पृहः॥ ३

ācāryāya dadau śeṣāṃ yāvatī bhūstadantarā|

manyamāna idaṃ kṛtsnaṃ brāhmaṇo'rhati niḥspṛhaḥ|| 3

अर्थ

उनके बीचमें जितनी भूमि बच रही थी, वह उन्होंने आचार्यको दे दी। उनका यह निश्‍चय था कि सम्पूर्ण भूमण्डलका एकमात्र अधिकारी निःस्पृह ब्राह्मण ही है॥ ३॥

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