श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.35

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तस्मिन् स भगवान् रामः स्निग्धया प्रिययेष्टया।

रेमे स्वारामधीराणामृषभः सीतया किल॥ ३५

tasmin sa bhagavān rāmaḥ snigdhayā priyayeṣṭayā|

reme svārāmadhīrāṇāmṛṣabhaḥ sītayā kila|| 35

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीरामजी आत्माराम जितेन्द्रिय पुरुषोंके शिरोमणि थे। उसी महलमें वे अपनी प्राणप्रिया प्रेममयी पत्‍नी श्रीसीताजीके साथ विहार करते थे॥ ३५॥

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