श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.7

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

नमो ब्रह्मण्यदेवाय रामायाकुण्ठमेधसे।

उत्तमश्‍लोकधुर्याय न्यस्तदण्डार्पिताङ्‌घ्र‌ये॥ ७

namo brahmaṇyadevāya rāmāyākuṇṭhamedhase|

uttamaślokadhuryāya nyastadaṇḍārpitāṅghraye|| 7

अर्थ

आपका ज्ञान अनन्त है। पवित्र कीर्तिवाले पुरुषोंमें आप सर्वश्रेष्ठ हैं। उन महात्माओंको, जो किसीको किसी प्रकारकी पीड़ा नहीं पहुँचाते, आपने अपने चरणकमल दे रखे हैं। ऐसा होनेपर भी आप ब्राह्मणोंको अपना इष्टदेव मानते हैं। भगवन्! आपके इस रामरूपको हम नमस्कार करते हैं’॥ ७॥

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