श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

कदाचिल्लोकजिज्ञासुर्गूढो रात्र्यामलक्षितः।

चरन् वाचोऽशृणोद् रामो भार्यामुद्दिश्य कस्यचित्॥ ८

kadācillokajijñāsurgūḍho rātryāmalakṣitaḥ|

caran vāco'śṛṇod rāmo bhāryāmuddiśya kasyacit|| 8

अर्थ

परीक्षित्! एक बार अपनी प्रजाकी स्थिति जाननेके लिये भगवान् श्रीरामजी रातके समय छिपकर बिना किसीको बतलाये घूम रहे थे। उस समय उन्होंने किसीकी यह बात सुनी। वह अपनी पत्‍नीसे कह रहा था॥ ८॥

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