मरुने योगसाधनासे सिद्धि प्राप्त कर ली और वह इस समय भी कलाप नामक ग्राममें रहता है। कलियुगके अन्तमें सूर्यवंशके नष्ट हो जानेपर वह उसे फिरसे चलायेगा॥ ६॥
योऽसावास्ते योगसिद्धः कलापग्राममाश्रितः।
कलेरन्ते सूर्यवंशं नष्टं भावयिता पुनः॥ ६
मरुने योगसाधनासे सिद्धि प्राप्त कर ली और वह इस समय भी कलाप नामक ग्राममें रहता है। कलियुगके अन्तमें सूर्यवंशके नष्ट हो जानेपर वह उसे फिरसे चलायेगा॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.12.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 65) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/12/6/