विश्वसाह्वका प्रसेनजित्, प्रसेनजित्का तक्षक और तक्षकका पुत्र बृहद्बल हुआ। परीक्षित्! इसी बृहद्बलको तुम्हारे पिता अभिमन्युने युद्धमें मार डाला था॥ ८॥
ततः प्रसेनजित् तस्मात् तक्षको भविता पुनः।
ततो बृहद्बलो यस्तु पित्रा ते समरे हतः॥ ८
विश्वसाह्वका प्रसेनजित्, प्रसेनजित्का तक्षक और तक्षकका पुत्र बृहद्बल हुआ। परीक्षित्! इसी बृहद्बलको तुम्हारे पिता अभिमन्युने युद्धमें मार डाला था॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.12.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 65) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/12/8/
टिप्पणियाँ
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प्राचीन प्रतिमें ‘ततः..पुनः’ यह पूर्वार्ध नहीं है, इसके स्थानपर वर्तमान प्रतिमें आया हुआ ‘भविता...मित्रजित्’ यह बारहवाँ श्लोक दिया है, इसमें भी ‘मरुदेवो’ के स्थानमें ‘मनुदेवो’ पाठ है।