अब वे एक-दूसरेसे इस प्रकार जोर-जोरसे झगड़ा करने लगे कि ‘यह तुम्हारा नहीं, मेरा है।’ ऋषियों और देवताओंने तारासे पूछा कि ‘यह किसका लड़का है।’ परन्तु ताराने लज्जावश कोई उत्तर न दिया॥ ११॥
ममायं न तवेत्युच्चैस्तस्मिन् विवदमानयोः।
पप्रच्छुर्ऋषयो देवा नैवोचे व्रीडिता तु सा॥ ११
अब वे एक-दूसरेसे इस प्रकार जोर-जोरसे झगड़ा करने लगे कि ‘यह तुम्हारा नहीं, मेरा है।’ ऋषियों और देवताओंने तारासे पूछा कि ‘यह किसका लड़का है।’ परन्तु ताराने लज्जावश कोई उत्तर न दिया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 70) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/14/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1133 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पप्रच्छुऋर्षयो → पप्रच्छुऋर्ऋषयो
#1134 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पप्रच्छुऋर्ऋषयो → पप्रच्छुर्ऋषयो