॥ श्रीहरिः ॥
कुमारो मातरं प्राह कुपितोऽलीकलज्जया।
किं न वोचस्यसद्वृत्ते आत्मावद्यं वदाशु मे॥ १२
kumāro mātaraṃ prāha kupito'līkalajjayā|
kiṃ na vocasyasadvṛtte ātmāvadyaṃ vadāśu me|| 12
अर्थ
बालकने अपनी माताकी झूठी लज्जासे क्रोधित होकर कहा—‘दुष्टे! तू बतलाती क्यों नहीं? तू अपना कुकर्म मुझे शीघ्र-से-शीघ्र बतला दे’॥ १२॥
कुमारो मातरं प्राह कुपितोऽलीकलज्जया।
किं न वोचस्यसद्वृत्ते आत्मावद्यं वदाशु मे॥ १२
बालकने अपनी माताकी झूठी लज्जासे क्रोधित होकर कहा—‘दुष्टे! तू बतलाती क्यों नहीं? तू अपना कुकर्म मुझे शीघ्र-से-शीघ्र बतला दे’॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.14.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 71) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/14/12/